ढाका, 26 फरवरी 2025: बांग्लादेश में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जनता में भय और आक्रोश फैल रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 19 फरवरी 2025 तक अकेले ढाका में 35 हत्याएं दर्ज की गई हैं, साथ ही लूटपाट, डकैती और अपहरण की कई घटनाएं सामने आई हैं। इस बढ़ते अपराध को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और निगरानी कड़ी कर दी है।
सरकार की प्रतिक्रिया चौंकाने वाली रही है। अंतरिम सरकार के गृह मामलों के सलाहकार मोइनुद्दीन अब्दुल्ला ने स्थिति को “संतोषजनक” बताते हुए इसे तवज्जो नहीं दी, जिससे जनता में अविश्वास बढ़ गया है।
सरकारी बयानों और जमीनी हकीकत के बीच भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने भी स्वीकार किया है कि अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई रिपोर्टों में दिन-दहाड़े हत्याएं, अपहरण और लूटपाट की घटनाओं का खुलासा किया गया है। इसके बावजूद, सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि स्थिति नियंत्रण में है।
नागरिकों में बढ़ती निराशा का प्रमाण हाल ही में ढाका में हुए छात्र आंदोलनों से मिलता है, जहां गृह मामलों के सलाहकार के इस्तीफे की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि सरकार की निष्क्रियता और झूठे आश्वासन जनता का विश्वास कमजोर कर रहे हैं और अपराधियों को अधिक साहसी बना रहे हैं।
राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में अपराधों की बढ़ोतरी ने कानून व्यवस्था बनाए रखना और मुश्किल बना दिया है। अंतरिम सरकार को अक्षमता और अधिकारों की कमी के लिए आलोचना झेलनी पड़ रही है। एक प्रमुख संपादकीय के अनुसार, गृह मामलों के सलाहकार अब्दुल्ला ने अपराधों की बढ़ती संख्या के लिए पूर्ववर्ती सत्ता पार्टी अवामी लीग को जिम्मेदार ठहराया है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पूर्ववर्ती पार्टी सरकार को कमजोर करने के लिए जानबूझकर अराजकता फैला रही है।
बांग्लादेश में अतीत में भी राजनीतिक बदलाव के दौरान हिंसा बढ़ती रही है, और मौजूदा अपराधों में वृद्धि उसी प्रवृत्ति को दर्शाती है। चिंता इस बात की है कि राजनीतिक दल अपने हित साधने के लिए इस अस्थिरता का फायदा उठा सकते हैं।
सरकार ने जनता के आक्रोश को देखते हुए पुलिस, सेना और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) की गश्त बढ़ा दी है, लेकिन लोग इस पर संदेह कर रहे हैं कि क्या इससे अपराध वास्तव में कम होगा। सरकार ने ऑपरेशन “डेविल हंट” के तहत जनवरी से अब तक 8,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस तरह की व्यापक गिरफ्तारियां दीर्घकालिक अपराध नियंत्रण में मददगार नहीं होतीं, बल्कि यह विपक्षी नेताओं और आलोचकों को दबाने का प्रयास हो सकता है।
सोशल मीडिया भी अपराध की घटनाओं को उजागर करने में अहम भूमिका निभा रहा है। हिंसक घटनाओं के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ रहा है और न्याय की मांग तेज हो रही है। हालांकि, सरकार ने सोशल मीडिया पर बढ़ते प्रभाव को देखते हुए डिजिटल प्लेटफार्मों पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही है। लेकिन इस कदम को आलोचकों ने सरकार की छवि सुधारने और सच्चाई दबाने की कोशिश करार दिया है।
बांग्लादेश एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है जहां सरकारी निष्क्रियता और जनता की नाराजगी एक विस्फोटक स्थिति बना सकती है। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सरकार और जनता के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो सकती है, जिससे शासन प्रणाली और सामाजिक स्थिरता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
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